कभी भीख मांग कर गुजरा करती थी, आज हैं आंध्र प्रदेश में पहली सरकारी नौकरी हासिल करने वाली ट्रांसजेंडर

कभी भीख मांग कर गुजरा करती थी, आज हैं आंध्र प्रदेश में पहली सरकारी नौकरी हासिल करने वाली ट्रांसजेंडर

जानकी बताती है कि ,”कोई इंसान अपने परिवार से मिलने वाले प्यार को नहीं भुला सकता. लेकिन जब परिवार के लोग ही हमें कलंक के तौर पर देखने लग जाएं तो वहां रहना मुश्किल हो जाता है.”

आंध्र प्रदेश: ट्रांसजेंडर नाम को लेकर समाज में एक अलग ही सोच है. ट्रांसजेंडर अपने हक़ के लिए आवाज उठाते रहते हैं. लेकिन आज हम आपको एक ऐसे ही ट्रांसजेंडर की कहानी बताने जा रहे हैं, जिन्हें आंध्र प्रदेश सरकार की मदद से नौकरी मिल गयी और इसके साथ ही वह राज्य की पहली ट्रांसजेंडर बन गयीं जो सरकारी नौकरी कर रही हैं. नाम है जानकी.

26 साल की जानकी को बचपन से ही पता था कि उनकी जेंडर आइडेंटिटी क्या है, लेकिन फिर भी उन्हें एक लड़के की तरह रहने और व्यवहार करने के लिए मजबूर किया जाता था. एक मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने की वजह से उनके पास घर के लोगों का कहा मानने के सिवा और कोई दूसरा चारा भी नहीं था. प्रताड़ना की वजह से घर छोड़कर भाग जाने वाली जानकी को अब सरकारी नौकरी मिल गई है और वह आंध्र प्रदेश की पहली ट्रांसजेंडर सरकारी कर्मचारी भी हैं.

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मैं जानती थी कि मैं क्या हूं-

मुंबई मिरर को दिए इंटरव्यू में जानकी ने कहा, ‘मैं जानती थी कि मैं क्या हूं. मेरी पहचान एक लड़के की नहीं थी, लेकिन मेरे घरवालों ने मुझे कभी खुद को व्यक्त करने का मौका ही नहीं दिया.’ जानकी ने 2012 में कंप्यूटर साइंस में ग्रैजुएशन किया था. उसके बाद उन्होंने बी.एड. करने का फैसला लिया. हमेशा सामाजिक दबाव के चलते उन्हें हमेशा हीन भावना से ग्रस्त रहना पड़ा. ये सारी चीजें उनके दिमाग में बुरा असर डाल रही थीं. वे और ज्यादा सहन भी नहीं कर सकती थीं, इसलिए उन्होंने घर छोड़कर भाग जाने का फैसला कर लिया. वे बाकी ट्रांसजेंडर समुदाय के लोगों के साथ जाकर रहने लगीं. वे लोग भी अपने-अपने घरों और समाज से प्रताड़ित लोग थे.

हालांकि बाद में जानकी ने अपने घर वालों से संपर्क करने की कोशिश भी की, लेकिन उनकी मां को छोड़कर किसी ने भी उनमें दिलचस्पी नहीं दिखाई और उन्हें नजरअंदाज कर दिया. उनकी मां उनसे कभी-कभी अलग जगह पर मिलती रहती थीं.

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भीख मांग कर गुजरा करती थी-

जानकी ने 2012 में कंप्यूटर साइंस में ग्रेजुएशन और उसके बाद बी एड भी किया हुआ है. घर छोड़ने के बाद जानकी धर्मशाला में रहने लगीं और भीख मांग कर गुजरा करने लगीं. जिले में आधार बनवाने के लिए जब रजिस्ट्रेशन हो रहा था तो डीएम ने उनकी योग्यता के बारे में जानकारी मांगी. अपनी पढाई-लिखाई के बारे में बताने पर डीएम ने उन्हें सरकारी नौकरी के लिए आवेदन करने को कहा. अपने दम पर जानकी इस परीक्षा में पास हो गयीं और उन्हें ये नौकरी मिल गयी.आंध्र प्रदेश सरकार की ओर से सरकारी नौकरी मिल जाने के बाद वे बेहद खुशी हैं. वे अभी कडप्पा जिले के चेन्नुरू मंदिर में रह रही हैं.

आपको जान कर हैरानी होगी जानकी के पास खुद रहने के लिए घर नहीं है, लेकिन वह सरकार के उस विभाग में काम कर रही हैं जो हजारों परिवारों को अपना खुद का घर मुहैया कराता है. वे अभी आंध्र प्रदेश सरकार के राज्य आवासीय निगम में डेटा एंट्री ऑपरेटर के तौर पर काम कर रही हैं. असिस्टेंट इंजीनियर ऑफिस में तैनात जानकी तमाम गांवों से घर के लिए आने वाले आवेदनों को देखती हैं. इंजीनियर से हरी झंडी मिलने के बाद वे योग्य आवेदकों के डेटा को सिस्टम में फीड करने का काम करती हैं. सरकारी विभाग के अफसर भी जानकी के काम की खूब तारीफ करते हैं.

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