अब तीन तलाक देने वालों को होगी 3 साल की गैर जमानती जेल

अब तीन तलाक देने वालों को होगी 3 साल की गैर जमानती जेल

नई दिल्ली: तीन तलाक पर प्रस्तावित एक कानून के मसौदे में कहा गया है कि एक बार में तीन तलाक गैरकानूनी होगा और ऐसा करने वाले पति को तीन साल के जेल की सजा हो सकती है. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के तीन तलाक पर पाबंदी लगाने के तीन महीने बाद केंद्र सरकार तीन तलाक के खिलाफ ड्राफ्ट लेकर आई है.

इस प्रस्तावित ड्राफ्ट में इंस्टैंट तीन यानि एक साथ तीन तलाक कहने को अपराध की श्रेणी में डाल दिया है. एक साथ तीन तलाक कहने को अब संज्ञय अपराध की श्रेणी में डाला गया है, साथ ही इसे गैर जमानती अपराध की श्रेणी में रखा गया है. अब तीन तलाक कहने तीन साल की सजा व जुर्माने का प्रावधान रखा गया है. प्रस्तावित कानून को मुस्लिम महिलाओं की सुरक्षा के लिए बनाया गया है.

यह परंपरा बंद हो जाएगी-

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि मसौदा ‘मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक’ शुक्रवार को राज्य सरकारों के पास उनकी राय जानने के लिए भेजा गया. उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों से मसौदे पर तुरंत प्रतिक्रिया देने को कहा गया है.

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अधिकारी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सरकार का मानना था कि यह परंपरा बंद हो जाएगी, लेकिन यह जारी रही, इस साल फैसले से पहले इस तरह के तलाक के 177 मामले जबकि इस फैसले के बाद 66 मामले दर्ज हुए.

महिलाएं अपने जीवन यापन, बच्चों के लिए खर्च के अलावा नाबालिग बच्चों की कस्टडी को भी मांग सकती हैं-

नए प्रस्तावित कानून में महिलाओं को इस बात का भी अधिकार दिया गया है कि तीन तलाक के खिलाफ वह कोर्ट का रुख कर सकती हैं और कोर्ट से राहत ले सकती हैं. महिलाएं अपने जीवन यापन, बच्चों के लिए खर्च के अलावा नाबालिग बच्चों की कस्टडी को भी मांग सकती हैं. सरकार के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक तीन तलाक खत्म करने के लिए सरकार संसद के शीतकालीन सत्र में कानून लाएगी. सरकार ‘द मुस्लिम वीमेन प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स इन मैरिज एक्ट’ नाम से इस विधेयक को लाएगी. ये कानून सिर्फ तीन तलाक (INSTANT TALAQ, यानि तलाक-ए-बिद्दत) पर ही लागू होगा. इस कानून के बाद कोई भी मुस्लिम पति अगर पत्नी को तीन तलाक देगा तो वो गैर-कानूनी होगा.

महिला खुद मांग कर सकती है, कितना गुजारा भत्ता देना है-

इसके बाद से किसी भी स्वरूप में दिया गया तीन तलाक वह चाहें मौखिक हो, लिखित और यो मैसेज में, वह अवैध होगा. जो भी तीन तलाक देगा, उसको तीन साल की सजा और जुर्माना हो सकता है. यानि तीन तलाक देना गैर-जमानती और संज्ञेय ( Cognizable) अपराध होगा. इसमें मजिस्ट्रेट तय करेगा कि कितना जुर्माना होगा.

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अगर किसी महिला को तीन तलाक दिया जाता है तो वह महिला खुद अपने और अपने नाबालिग बच्चों के लिए मजिस्ट्रेट से भरण-पोषण और गुजारा भत्ता की मांग कर सकती है. कितना गुजारा भत्ता देना है, उसका अमाउंट मजिस्ट्रेट तय करेगा. महिला अपने नाबालिग बच्चों की कस्टडी के लिए भी मजिस्ट्रेट से गुहार लगा सकती है.

तीन तलाक पर कानून बनाने के लिए एक मंत्री समूह बनाया था-

पीएम नरेंद्र मोदी ने तीन तलाक पर कानून बनाने के लिए एक मंत्री समूह बनाया था. जिसमे राजनाथ सिंह, सुषमा स्वराज, अरुण जेटली और रविशंकर प्रसाद भी शामिल थे. सूत्रों की मानें तो नए कानून में तीन तलाक को संज्ञेय अपराध, गैर जमानती अपराध के साथ 3 साल की सजा के पीछे सरकार का यह तर्क है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद भी लोगों ने तीन तलाक देना नहीं छोड़ा. यही नहीं सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद भी मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इसे रोकने के लिए कोई बड़ा कदम नहीं उठाया.

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सरकार के सूत्रों का कहना है कि 1986 के शाहबानो केस के बाद बना कानून तलाक के बाद के लिए था जबकि इस नए कानून से सरकार तीन तलाक को रोकना चाहती है और पीड़ित महिलाओं को न्याय देना चाहती है. सूत्रों का कहना है ये कानून संसद से पारित होने के बाद अस्तित्व में आएगा पर संसद चाहे तो इसे रेट्रोस्पेक्टिवली भी लागू कर सकती है.

तीन तलाक के कुल 244 मामले सामने आए हैं-

गौरतलब हो कि तीन तलाक के खिलाफ फैसला सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच में से तीन जजों ने जस्टिस रोहिंटन एफ नरीमन, उदय यू ललित, कूरियन जोसेफ ने इंस्टैंट तीन तलाक को गैर इस्लामिक बताते हुए इसपर रोक लगा दी थी साथ ही इसे धार्मिक परंपरा मानने से इनकार कर दिया था. सूत्रों की मानें तो सुप्रीम कोर्ट के सामने तीन तलाक के कुल 244 मामले सामने आए हैं ,जिसमे से 177 मामले सुप्रीम कोर्ट के आदेश से पहले के जबकि 77 मामले सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद के हैं, जिसमे उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक मामले हैं.

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