जब देश की इतनी खिचड़ी बन ही रही है, तो खिचड़ी को राष्ट्रीय व्यंजन बनाने में क्या दिक्कत है

जब देश की इतनी खिचड़ी बन ही रही है, तो खिचड़ी को राष्ट्रीय व्यंजन बनाने में क्या दिक्कत है

न्यूज चैनलों और वेबसाइटों पर चल रही खबरों के मुताबिक खिचड़ी को ‘राष्ट्रीय व्यंजन’ घोषित किया जा सकता है.  लेकिन केंद्रीय खाद्य मंत्री हरसिमरत कौर ट्वीट किया. उन्होंने लिखा कि खिचड़ी को राष्ट्रीय भोजन घोषित करने की खबरों में कोई सच्चाई नहीं है और इसे बस विश्व रिकॉर्ड के लिए भारत की ओर से एंट्री दी गई है. 

 

 

जिसके बाद दिल्ली में आज भारत का अब तक का सबसे बड़ा फूड शो – वर्ल्ड फूड इंडिया आयोजित किया गया. दिल्ली के इंडिया गेट में आज वर्ल्ड फूड इंडिया में 50 खानसामे मिलकर 1100 किलो रिकॉर्ड वाली खिचड़ी बनाई. खिचड़ी बनाने के लिए केंद्रीय मंत्री निरंजन ज्योति और हरसमिरन कौर समेत कई दिग्गज हस्तियां जुटीं.

खिचड़ी को इंसुलेटेड कढ़ाई स्टीम में पकाई गई. इंडिया गेट में आग से खाना नहीं पकाया जा सकता, जिसके चलते इंसुलेटेड पाइप से खिचड़ी को पकाया गया है. इस पौष्टिक खिचड़ी को दाल, चावल, बाजरा, रागी मूंग और छिलके वाली दाल से मिलाकर तैयार किया गया.

इस ‘वर्ल्ड फ़ूड इंडिया’ में 1100 किलो खिचड़ी बनाई गई. इसमें 500 किलो चावल, 300 किलो दाल, 100 किलो घी और बाकी मसाला डाला गया. इसे मशहूर शेफ संजीव कपूर की कुशल देख-रेख में 50 शेफ ने बनाया गया. हालांकि इसमें देसी घी का तड़का योग गुरु स्वामी रामदेव ने लगाया.

 

खिचड़ी भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग है. देश के अलग-अलग प्रान्तों और इलाकों में इसके खाने और परोसने का अपना अलग अंदाज है, लेकिन एक बात की समानता यह है कि खिचड़ी हर आम और खास के जीवन से जुड़ी हुई है.

अगर मैं अपनी बात करूं तो  व्यक्तिगत तौर पर खिचड़ी मेरा पसंदीदा खाना है. मैं आजमगढ़ यानी पूर्वांचल का हूं, तो हमारे यहां खिचड़ी, भौरी-चोखा, घी, चटनी, के साथ परोसी जाती है ‘भौरी का मतलब बाटी से है’. हमारे यहां खिचड़ी ऐसी बनती है की मैं तो पूरे साल खा सकता हूं.

एक मजे की बात बताएं हमारे यहां खिचड़ी सप्ताह में एक दिन विशेष रूप से बनाई जाती है. वो दिन है शनिवार का. अम्मा कहती हैं कि शनिवार को खिचड़ी बनाने से घर में कलह नहीं मचता. अम्मा का लॉजिक समझ ही नहीं आता. अब कहती हैं तो हम भी मान लेते हैं. ज्यादा प्रश्नोत्तरी के चक्कर में नहीं पड़ते पता चला कि खिचड़ी, भौरी-चोखा, घी, चटनी, के साथ चप्पल भी मिल जाए. वो क्या है ना कुछ जगहों पर आपके तर्क काम नहीं करते. अम्मां के सामने भी वही हाल है.

वैसे भी देश की इतनी खिचड़ी बन ही रही है, तो खिचड़ी को राष्ट्रीय व्यंजन बनाने में क्या दिक्कत है. “अब पकाओ और खाओ खिचड़ी.”

vibhav shukla

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