अनुच्छेद 35 (ए) से छेड़छाड़ हुई तो कश्मीर में तिरंगे के डंडे को कंधा देने वाला कोई नहीं होगा: महबूबा मुफ्ती

अनुच्छेद 35 (ए) से छेड़छाड़ हुई तो कश्मीर में तिरंगे के डंडे को कंधा देने वाला कोई नहीं होगा: महबूबा मुफ्ती
सीएम महबूबा मुफ्ती एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि, ‘मेरी पार्टी और अन्य पार्टियां जम्मू कश्मीर में तमाम समस्या के बावजूद हाथों में तिरंगा रखते हैं, मुझे यह कहने में तनिक भी संदेह नहीं है अगर (अनुच्छेद 35 ए) में कोई भी बदलाव किया गया तो कोई भी तिरंगा थामने वाला हाथ नहीं होगा’.

नई दिल्ली: जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने शुक्रवार (28 जुलाई) को दो टूक कहा कि अगर घाटी के लोगों के विशेषाधिकारों में किसी तरह की छेड़खानी की गई तो यहां तिरंगा पकड़ने वाला कोई नहीं होगा. उन्होंने कहा कि एक तरफ “हम संविधान के दायरे में कश्मीर मुद्दे का समाधान करने की बात करते हैं और दूसरी तरफ हम इसपर हमला करते हैं.” आखिर इन सबके चलते सबसे ज्यादा इसे लेकर राज्य ने ही भुगता है.

सीएम महबूबा ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि, “कौन यह कर रहा है. क्यों वे ऐसा कर रहे हैं (अनुच्छेद 35 ए को चुनौती) मुझे आपको बताने दें कि मेरी पार्टी और अन्य पार्टियां जो तमाम जोखिमों के बावजूद जम्मू कश्मीर में राष्ट्रीय ध्वज हाथों में रखती हैं, मुझे यह कहने में तनिक भी संदेह नहीं है कि अगर इसे लेकर कोई भी बदलाव किया गया तो फिर (राष्ट्रीय ध्वज) को थामने वाला घाटी में कोई नहीं होगा.” मुझे साफ तौर पर कहने दें. यह सब करके (अनुच्छेद 35 ए) को चुनौती देकर, आप अलगाववादियों को निशाना नहीं बना रहे हैं. उनका (अलगाववादी) एजेंडा अलग है और यह बिल्कुल अलगाववादी है.”

महबूबा ने कहा कि जब वह होश संभाल रही थीं तो उनके लिए भारत की प्रतिनिधि इंदिरा गांधी थीं। कुछ लोगों को इससे परेशानी हो सकती है, लेकिन यह सच है कि भारत का मतलब इंदिरा गांधी है। उनका इशारा नेहरू-गांधी परिवार के प्रति संघ परिवार की चिढ़ को लेकर था।

अनुच्‍छेद 35ए में बदलाव सरासर गलत

मुख्यमंत्री ने कहा कि जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त करना सरासर गलत होगा। अगर ऐसा हुआ तो तिरंगे को यहां थामने वाला कोई नहीं होगा। यहां के लोग विशेष प्रकृति के हैं। वह भारत में रहते हैं, क्योंकि यही एक देश है जहां हिंदू-मुस्लिम एक साथ प्रार्थना करते हैं। यहां भगवान की मूर्ति को मुस्लिम कलाकार अपने हाथों से तराशते हैं। उनका कहना था कि विविधता के मामले में कश्मीर को छोटा भारत कहा जा सकता है।

सीमा पार लोगों से संवाद का इशारा

मुफ्ती के अनुसार, आज के दौर में जरूरत है कि कश्मीर में गूंज रहे आजादी के नारे को किसी दूसरे वाक्य से तब्दील किया जाए। उन्होंने इशारों में कहा कि सीमा पार रह रहे लोगों के साथ संवाद बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने टीवी पर कश्मीर को लेकर चलने वाले डिबेट पर कहा कि ये लोग गलत तस्वीर बयान कर रहे हैं। उनका कहना था कि जिन लोगों ने विभाजन के बाद भारत को अपना देश माना और जो आम चुनावों में शिरकत करते आ रहे हैं, उन्हें कमजोर करना राष्ट्रीयता के लिहाज से गलत होगा।

खतरे में होगा तिरंगा

उन्‍होंने कहा, ‘संविधान के धारा 370 से हमें विशेष दर्जा मिला है। अनुच्‍छेद 35 ए सुप्रीम कोर्ट में है और उसमें बदलाव के लिए चर्चा की जा रही है तो मैं यह स्‍पष्‍ट कर दूं कि अगर इसमें बदलाव होता है तो जो कश्‍मीर में इतने खतरों को झेलते हुए देश के तिरंगे की रक्षा कर रहे हैं, वे वहां नहीं रुकेंगे और इसके बाद तिरंगे को कंधा देने वाला भी कोई नहीं होगा। इस धारा में किसी तरह के हेरफेर को मंजूरी नहीं दी जाएगी।‘

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तरह के प्रावधान लागू कर आप अलगाववादियों पर निशाना नहीं साध रहे बल्कि उन सैन्यबल को कमजोर कर रहे हैं जिन्होंने भारत को स्वीकृत कर चुनावों में हिस्सा लिया है। वे जम्मू कश्मीर को भारत के साथ मिलाने के लिए प्रयास कर रहे हैं। आप उन्हें कमजोर बना रहे हैं।

अनुच्‍छेद 35ए को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 35 ए को चुनौती देकर अलगाववादियों को टारगेट नहीं कर सकते है. मुफ्ती ने इशारों-इशारों में केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आप उन लोगों की ताकत को कमजोर कर रहे हैं जो जिनका भारत के संविधान में विश्वास में है, जिनका भरोसा देश के साथ है. वो लोग चुनाव में हिस्सा लेते है और जम्मू कश्मीर में सम्मान की जिंदगी जीना चाहते है.

बता दें कि 2014 में एनजीओ (We The Citizens) ने आर्टिकल 35A को कानूनी तौर पर खत्म करने की मांग की है. सुप्रीम कोर्ट में दायर पिटीशन पर फिलहाल सुनवाई पेंडिंग है. अब कोर्ट ने इसे सुनवाई के लिए तीन जजों की बेंच के पास भेजा है. पिटीशन में कहा गया है कि आर्टिकल को संसद में नहीं रखा गया, बल्कि इसे सीधे राष्ट्रपति के ऑर्डर से लागू कर दिया गया. अब कोर्ट ने इसे सुनवाई के लिए तीन जजों की बेंच के पास भेजा है

vibhav shukla

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