फीफा अंडर-17 फुटबॉल विश्वकप : आज विश्व कप का होगा आगाज, मुकाबले में उतरने के साथ ही इतिहास रच देगी भारतीय टीम

फीफा अंडर-17 फुटबॉल विश्वकप : आज विश्व कप का होगा आगाज, मुकाबले में उतरने के साथ ही इतिहास रच देगी भारतीय टीम

फीफा अंडर-17 विश्व कप का आगाज होने में कुछ समय ही बाकी रहा है. इसका उद्घाटन मैच नई दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में खेला जायेगा. फीफा भारत के 6 अलग- अलग शहरों में खेला जायेगा। इसके कुल 6 ग्रुप हैं, जिनमें 24 टीमें भाग ले रही हैं. पहले दिन मेजबान भारत का मुकाबला अमेरिका से है जिसमें खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मैच को देखने के लिए मैदान में मौजूद होंगे. फीफा की ओर से हिंदी में ट्विटर अकाउंट बनाया गया है. फीफा भारत में फुटबॉल की स्थिति को सुधारने में कामयाब होगा, ऐसा खेल विशेषज्ञों का मानना है.

दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में रात 8 बजे भारत का मैच शुरू होगा. पीएम मोदी के साथ मैच देखने के लिए कई बच्चे भी जाएंगे. वैसे मैच के अधिकतर टिकट बिक चुके हैं.

आज़ादी के बाद पहली बार फीफा-

गौरतलब है कि आज़ादी के बाद ऐसा पहली बार होगा जब भारत किसी भी फीफा वर्ल्ड कप में हिस्सा ले रहा होगा. इससे पहले जब 1950 में भारत को सीनियर वर्ल्ड कप खेलने का मौका मिला था, तब उसने ठुकरा दिया था. क्योंकि शर्त जूते पहनकर खेलने की थी. लेकिन अब भारत बदल चुका है. हम क्रिकेट के बादशाह तो हैं ही, अब बारी फुटबॉल में दम दिखाने की है.

हिंदी में आया फीफा-

 

लोगों को फुटबॉल का दीवाना बनाने के लिए फीफा ने भी पूरी तैयारी कर ली है. फीफा ने हिंदी ट्विटर अकाउंट खोला है, जिससे वह टूर्नामेंट से जुड़ी सभी जानकारी हिंदी में साझा करेगा.

सचिन ने कहा – बेस्ट ऑफ लक-

पूर्व क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने भी भारतीय टीम को पहले मैच के लिए शुभकामनाएं दी. सचिन ने वीडियो जारी कर कहा कि ये भारतीय खेल के लिए एक बड़ा पल है हमें इस पर गर्व करना चाहिए.

 

अनुभव बनाम नौसिखिए की जंग-

भारतीय टीम को इस वर्ल्ड कप में खेलने का मौका इसलिए मिल रहा है क्योंकि वह मेजबान है. भारतीय टीम पहली बार हिस्सा ले रही है, लेकिन अमेरिका की टीम नई नहीं है. वह 15 बार इस टूर्नामेंट में हिस्सा ले चुकी है, और 4 बार क्वार्टर फाइनल का भी सफर कर चुकी है. बता दें कि अमेरिका, कोलंबिया और दो बार की चैंपियन घाना के साथ कठिन ग्रुप ए में शामिल भारतीय टीम को निश्चित रूप से अगले दौर में पहुंचने के दावेदार के रूप में नहीं देखा जा रहा है. लेकिन टीम के खिलाड़ी जोश से भरे हैं और अपना सर्वश्रेष्ठ करने के लिए बेताब हैं. इस ग्रुप में अमेरिकी टीम प्रबल दावेदार है जिसके ज्यादातर खिलाड़ी मेजर लीग सॉकर की युवा टीम में खेल चुके हैं और कुछ तो शीर्ष यूरोपीय क्लबों के लिए खेलने के लिए तैयार हैं.

पूर्व खिलाड़ियों को भी इस टूर्नामेंट से काफी उम्मीद –

महासंघ के साथ ही कुछ पूर्व खिलाड़ियों को भी इस टूर्नामेंट से काफी उम्मीद है. वे मानते हैं कि भारतीय टीम फिर से 1950 और 1960 के दशक जैसी मजबूत बन सकची है. अंडर- 17 विश्व कप की मेजबानी से निश्चित रूप से बड़े टूर्नामेंट के आयोजन के रास्ते भी खुल जाएंगे, जिसमें अंडर-20 फीफा विश्व कप टूर्नामेंट शामिल है जिसके लिए भारत ने 2019 संस्करण के लिए बोली लगाई है.

बिना किसी दबाव के खेलें खिलाड़ी-

कोच डि माटोस चाहते हैं कि खिलाड़ी बिना किसी दबाव के प्रतिस्पर्धी होकर खेलें और गोल का कोई मौका नहीं गंवाएं. उन्होंने अमेरिका के खिलाफ मुकाबले के बारे में कहा, ‘उनका आक्रमण काफी मजबूत है और हमें डिफेंस में मजबूत होना होगा.’ वहीं, अमेरिका के मुख्य कोच जान हैकवर्थ ने भारत को हल्के में लेने से इन्कार करते हुए कहा, ‘हम पहले एक बार भारत के खिलाफ खेल चुके हैं और उनके खिलाफ सफल रहे थे. लेकिन वो विश्व कप का शुरुआती मैच नहीं था और वे विश्व कप की मेजबानी भी नहीं कर रहे थे. उन्हें काफी घरेलू समर्थन मिलेगा.’ पिछले साल ब्रिक्स चैंपियनिशप में ब्राजील के खिलाफ शानदार गोल करने वाले मिडफील्डर कोमल थाटल की कोशिश वैसा ही प्रदर्शन करने पर लगी हैं जिनका मानना है कि टीम के खिलाड़ी मानसिक और शारीरिक रूप से पूरी तरह से तैयार हैं.

घरेलू दर्शकों का मिलेगा समर्थन-

उद्घाटन मैच का हाउस फुल होना तय हो चुका है. ऐसे में घरेलू दर्शकों के समर्थन के बीच भारत के पास अपने पहले मैच में ही उलटफेर भरा नतीजा देने का सुनहरा अवसर होगा. अमेरिका के सामने लंबे सफर की थकान से उबरने और उपमहाद्वीपिय मौसम में खुद को ढालने की चुनौती भी होगी. अमेरिका के संभलने के पहले यदि भारत वार करने में सफल रहा, यानी शुरुआती मिनटों में ही गोल करने में सफल रहा तो एक अरब से ज्यादा की आबादी वाले इस देश का अगला राउंड लगभग तय हो जाएगा. अगर भारत ने ड्रॉ भी खेल लिया तो भी उम्मीदों की डोर टूटेगी नहीं.

अमेरिका के पास अनुभव का अपार भंडार-

अमेरिकी टीम ने फीफा अंडर-17 विश्वकप के कुल 16 संस्करणों में से 15 में हिस्सा लिया है. अमेरिका ने अब तक केवल 2013 में एक बार इस वर्ग के फीफा टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं लिया है. इस लिहाज से वह मेजबान टीम के सामने न सिर्फ काफी मजबूत होगी, बल्कि उसके पास विश्वकप का अपार अनुभव भी है. इसके अलावा अमेरिकी टीम के 21 में से 12 खिलाड़ी दुनिया के बड़े फुटबॉल लीग क्लबों की ओर से भी खेलते हैं.

कौन बनाएगा नॉकआउट चरण में जगह-

प्रत्येक ग्रुप में शीर्ष पर रहने वाली दो टीमें और ग्रुप में तीसरे स्थान पर रहने वाली सर्वश्रेष्ठ चार टीमें नॉकआउट चरण में जगह बनाएंगी. यानी भारत अपने ग्रुप में तीसरे स्थान पर भी रहता है तो भी वो अगले दौर में जगह बना सकता है. टूर्नामेंट में तीन बार की चैंपियन ब्राजील, यूरोपीय विजेता स्पेन और मेक्सिको ट्रॉफी जीतने की प्रबल दावेदार हैं, जबकि दो बार की चैंपियन घाना, जर्मनी, इंग्लैंड और अमेरिका भी अपने प्रदर्शन से हैरान कर सकती हैं.
भारत मेजबानी करने वाला पांचवां एशियाई देश चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और संयुक्त अरब अमीरात के बाद भारत पांचवां एशियाई देश है जो 1985 से शुरू हुए इस टूर्नामेंट की मेजबानी कर रहा है.

फीफा अंडर-17 वर्ल्ड कप के 6 ग्रुप इस प्रकार है –

ग्रुप ए – भारत, अमेरिका, कोलंबिया और घाना

ग्रुप बी – पराग्वे, माली, न्यूजीलैंड और तुर्की

ग्रुप सी – ईरान, गिनी, जर्मनी और कोस्टा रिका

ग्रुप डी – नॉर्थ कोरिया, नाइजर, ब्राजील और स्पेन

ग्रुप ई – होंडुरास, जापान, न्यू कैलिडोनिया और फ्रांस

ग्रुप एफ – इराक, मैक्सिको, चिली और इंग्लैंड

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